बिना वजह का पुलिस द्वारा परेशान करना लोगो के तनाव का मुख्य कारण बना हुआ है। वही पत्रकार भी इस पुलिसिया कार्यवाही से बच नही पा रहे है क्योंकि उनको भी परेशान किया जाता रहा है। महा ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन गाजीपुर के जिलाध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने कहा कि पत्रकार बंधु भारतीय लोकतंत्र में शामिल वह स्तंभ हैं जो समाज के प्रथम छोर से अंतिम छोर तक मौजूद हर किसी व्यक्ति एवं आवाम की दबी आवाज को बुलंद करते हैं।
इसके बावजूद योगी सरकार में गाजीपुर पुलिस अब पत्रकारो को ही अपना निशाना बनाने में लगी हुई है। इसका जीता जागता सबूत पत्रकार द सर्जिकल न्यूज के चन्दन शर्मा ने एसपी के नाम से जब पुलिस कर्मियों को ग्रामीणों ने पीटा तो खबर लगाई, कुछ ही देर बाद फोन पर पत्रकार को पुलिस अधीक्षक महोदय ने हड़काया। वही एक सप्ताह भी नही हुआ।
तब तक सैदपुर पुलिस ने एक पत्रकार को रविवार की सुबह 9 बजे कोरोना गाइड लाइन का हवाला देकर दुर्व्यवहार किया। इससे जाहिर होता है कि जिले की पुलिस अपराधियों को पकड़ने में नाकामी छुपाने को लेकर अब पत्रकारो को अपराधी की तरह टारगेट करती नजर आ रही है और कभी भी किसी भी पत्रकार के साथ फर्जी फिकेशन कर सकती है।
पत्रकार संगठन प्रशासन से मांग करता है कि सैदपुर मामले में जाँच करके उचित कार्यवाही करते हुए, भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति को रोकने का प्रयास करे ताकि पत्रकार हित सुरक्षित रहे। अगर ऐसा नही होगा तो पत्रकार संगठन मजबूर होकर अगला कदम उठा सकता है, जिसकी जिम्मेदारी पूर्णतः शासन प्रशासन की होगी।
वाहरें सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि पत्रकारों को धमकाने वालों की तुरन्त गिरफ्तारी हो। साथ ही जो भी पत्रकार पर फर्जी मुकदमा बिना जांच के लिखे उसपर भी कार्यवाही करने के लिए सभी प्रदेशों के डीजीपी को आदेश दिया है। लेकिन जब एसएसपी रैंक का अधिकारी ही पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने लगे तो फिर पत्रकार हित की बात करना तो बेमानी ही लगता है।


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